कर्नाटकसङ्गीतस्य त्रिमूर्तिष्वन्यतमः, श्रीविद्योपासकः, संस्कृतविद्वान्, अखण्डभारतस्य सांस्कृतिकैकात्म्यदृष्टा च श्रीमुत्तुस्वामिदीक्षितः स्वकीयैः सङ्गीतप्रबन्धैर्भक्तिं ज्ञानं सङ्गीतं चैकसूत्रेणाबबन्ध। तस्य गुरुगुहाङ्किताः कृतयः भारतवर्षस्य पुण्यक्षेत्राणां देवताराधनापरम्पराणां सनातनविद्यानां च स्वरमयीं समग्रां दृष्टिं प्रकाशयन्ति। तस्य जन्मद्विशतपञ्चाशद्वर्षपूर्त्यवसरे समर्प्यमाणा इयं स्मारकमुद्रा तस्मै महात्मने राष्ट्रस्य विनीतः श्रद्धाञ्जलिः। गुरुगुहस्य कीर्तिरक्षया विराजताम्॥
कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति में से एक, श्री मुत्तुस्वामी दीक्षित, श्रीविद्या के निष्ठावान उपासक, संस्कृत के विद्वान और भारत की सांस्कृतिक एकता के दूरदर्शी थे। उनकी अमर ‘गुरुगुहा’ रचनाएँ भक्ति, ज्ञान और संगीत का संगम हैं, जो एक अखिल भारतीय आध्यात्मिक दृष्टिकोण के माध्यम से भारत के पवित्र भूगोल और उसकी विविध परंपराओं को आलोकित करती हैं। उनकी 250वीं जयंती के अवसर पर, यह सिक्का एक महान संगीत-ऋषि की कालजयी प्रतिभा के प्रति राष्ट्र की विनम्र श्रद्धांजलि है। गुरुगुहा की महिमा सदैव बनी रहे।
“Śrī Muttusvāmi Dīkṣita, one of the Trinity of Carnatic music, was a devoted Śrīvidyā upāsaka, Sanskrit savant, and visionary of India’s civilisational unity. His immortal Guruguha compositions unite devotion, knowledge and music, illuminating the sacred geography of Bhārata and its diverse traditions within a pan-Indian spiritual vision. On the commemoration of his 250th birth anniversary, this coin stands as the nation’s humble homage to the enduring genius of a musical sage. May the glory of Guruguha remain eternal.”













